Showing posts with label Businessman. Show all posts
Showing posts with label Businessman. Show all posts

Sunday, 17 December 2017

दादाभाई नौरोजी जीवन परिचय | Dadabhai Naoroji biography in Hindi

दादाभाई नौरोजी जीवन परिचय | Dadabhai Naoroji biography in Hindi-

Dadabhai Naoroji – दादाभाई नौरोजी भारतीय इतिहास के एक महान व्यक्ति के नाम से जाने जाते है। वे एक पारसी बुद्धिजीवी व्यक्ति, शिक्षप्रेमि, कॉटन के व्यापारी और साथ ही भारतीय स्वतंत्रता अभियान के महान राजनितिक नेता भी थे।

दादाभाई नौरोजी जीवन परिचय – Dadabhai Naoroji biography in Hindi

पूरा नाम    – दादाभाई पालनजी नौरोजी
जन्म        – 4 सितंबर 1825
जन्मस्थान – बम्बई
पिता        – पालनजी दोर्डी नौरोजी
माता        – माणिकबाई
शिक्षा       – 1845 में बंम्बई के एलफिन्स्टन विश्वविद्यालय से उपाधि संपादन की।
विवाह      – गुलाबी के साथ।
नौरोजी का जन्म मुम्बई में हुआ और उन्होंने Elphinstone College से शिक्षा ग्रहण की। उनकी कुशलता को निहारते हुए बरोदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय ने उन्हें 1874 में अपने साम्राज्य का दीवान बनाया। नौरोजी महाराजा द्वारा दिए गए हर एक आदेश का पालन करते और इसी के चलते उन्होंने रहनुमाई मैदायस्ने सभा (जो मैदायस्ने मार्ग के पथप्रदर्शक थे) को 1 अगस्त 1851 को खोज निकाला और जरदुष्ट धर्म को पुर्नस्थापित करने में जूट गए। 1854 में उन्होंने इस समुदाय को आसानी से समझने के लिए एक प्रकाशन की खोज की, जिस से वे आसानी से लोगो के बिच रह सके। 1855 में उन्हें elphinstone College में गणित के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया, उस समय ऐसा शैक्षणिक दर्जा पाने वाले वे पहले व्यक्ति थे। 1855 में उन्होंने कामा & कंपनी के सहयोगी बनने की इच्छा से लंदन की यात्रा की और साथ ही यह पहली भारतीय कंपनी बनी जो ब्रिटेन में स्थापित हुई। लेकिन 3 साल के अंदर ही नौरोजी ने इस्तीफा दे दिया। 1859 में उन्होंने खुद की एक कॉटन ट्रेडिंग कंपनी स्थापित की, जो बाद में दादाभाई नौरोजी & कंपनी के नाम से जाने जानी लगी, वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन के गुजरात में पहले प्रोफेसर बने।
1867 में दादाभाई नौरोजी ने ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना में सहायता भी की जो भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस की एक मुख्य संस्था थी जिसका मुख्य उद्देश् ब्रिटिशो के सामने भारतीयो की ताकत को रखना था। बाद में लंदन की एथेनॉलॉजिकल सोसाइटी ने इसे प्रचारविधान संस्था बतलाकर 1866 में भारतीयो की हीनभावना को दर्शाने की कोशिश की। इस संस्था को बाद में प्रसिद्द यूरोपियन लोगो का सहयोग मिला और बाद में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन में ब्रिटिश संसद पर अपना प्रभाव छोड़ना शुरू किया। 1874 में वे बारोदा के प्रधानमंत्री बने और 1885 से 1888 तक मुंबई लेजिस्लेटिव कौंसिल के सदस्य बने। वे सर सुरेन्द्रनाथ बनर्जी द्वारा कलकत्ता में बॉम्बे के भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस की स्थापना से पूर्व भारतीय राष्ट्रिय एसोसिएशन के सदस्य भी बने। भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रिय एसोसिएशन का एक ही उद्देश था। बाद में इन दोनों को मिलकर INC की स्थापना की गयी, 1886 में नौरोजी की भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। नौरोजी ने 1901 में अपनी किताब “Poverty And Un-British Rule in India” को प्रकाशित किया।
1892 से 1895 तक यूनाइटेड किंगडम भवन की संसद में उदारपंथी पार्टी के नेता थे और ब्रिटिशो के M.P. बनने वाले वे पहले एशियाई थे। उन्होंने ऐ.ओ. हुमे और एडुलजी वाचा के साथ मिलकर उस समय की विशाल पार्टी भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस को और अधिक शक्तिशाली बनाया। उनकी किताब गरीबी और भारत में ब्रिटिश नियमो विनाश करना, को उस समय भारतीय समाज का बहोत प्रतिसाद मिला। उन्होंने उस समय अपनी किताब में विदेशो में ले जाये भारतीय धन को वापिस लाने की भी मांग की। वे कौस्तस्कि और प्लेखानोव के साथ दूसरे अंतर्राष्ट्रीय समूह के सदस्य भी रह चुके थे।
दादाभाई नौरोजी ने विदेशो में भारत का वर्चस्व बढाया और यूरोपियन लोगो को भारतीयों की ताकत और बुद्धिमत्ता का दर्शन करवाया। ब्रिटिश कालीन भारत में ब्रिटिश अधिकारी भारतीयों से नफरत करते थे उस समय उन्होंने अपनी खुद की कॉटन कंपनी स्थापित कर के ब्रिटिश कंपनियों को कड़ी टक्कर दी थी। वे एक व्यापारी होने के साथ-साथ भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के महान क्रन्तिकारी नेता भी थे।

Dadabhai Naoroji Contribution  –

  1. शिक्षा पूरी करने  बाद उनकी बम्बई के एलफिन्स्टन कॉलेज में गणित के अध्यापक के रूप में नियुक्ती हुयी। इस कॉलेज में अध्यापक होने का सम्मान पाने वाले वो पहले भारतीय थे।
  2. 1851 में लोगोंमे सामाजिक और राजकीय सवालो पर जागृती लाने के लिये दादाभाई नौरोजीने ‘रास्त गोफ्तार’ (सच्चा समाचार ) ये गुजराती साप्ताहिक शुरु किया।
  3. 1852में दादाभाई नौरोजी और नाना शंकर सेठ इन दोनोंने आगे बठकर बंम्बई में ‘बॉम्बे असोसिएशन’ इस संस्था की स्थापना की। हिंदू जनता की दुख, कठिनाइयाँ अंग्रेज सरकार को दीखाना और जनता के सुख के लिये सरकार ने हर एक बात के लिये मन से मदत करनी चाहिये, ये इस संस्था स्थापना का उददेश्य था।
  4. 1855 में लंडन के ‘कामा और कंपनी’ के मॅनेजर के रूप में वहा गये।
  5. 1865 से 1866 इस समय में उन्होंने लंडन के युनिव्हर्सिटी कॉलेज मे गुजराती भाषा के अध्यापक के रूप में भी काम किया।
  6. 1866 में दादाभाई नौरोजी ने इंग्लंड में रहते समय मे ‘ईस्ट इंडिया असोसिएशन’ इस नाम की संस्था स्थापन की। हिंदु लोगोंके आर्थिक समस्या के बारेमे सोच कर और उन सवालोपर इंग्लंड में के लोगोंका वोट खुद को अनुकूल बना लेना ये इस संस्था का उददेश्य था।
  7. 1874 में बडोदा संस्थान के मुनशी पद की जिम्मेदारी उन्होंने स्वीकार की। बहोत सुधार करने के वजह से उनकी कामगिरी संस्मरणीय रही। पर दरबार के लोगों के कार्यवाही के वजह से दादाभाई नौरोजी कम समय में मुनशी पद छोड़कर चले गये।
  8. 1875 मे वो बम्बई महानगरपालिका के सदंस्य बने।
  9. 1885 मे बम्बई प्रातिंय  कांयदेमंडल के सदस्य हुये।
  10. 1885 मे बम्बई मे राष्ट्रीय सभा की स्थापना की गयी उसमे दादाभाई नौरोजी आगे थे।
  11. 1886 (कोलकता), 1893 (लाहोर) और 1906 (कोलकता) ऐसे तीन अधिवेशन के अध्यक्ष के रूप में उन्हें चुना गया।
  12. 1892 मे इंग्लंड मे के ‘फिन्सबरी’ मतदार संघ में से वो हाउस ऑफ कॉमन्सवर चुनकर आये थे। ब्रिटिश संसद के पहले हिंदू सदस्य बनने का सम्मान उनको मिला।
  13. 1906 मे कोलकाता यहा अधिवेशन था। तब दादाभाई नौरोजी उसके अध्यक्ष थे उस अधिवेशन मे स्वराज्य की मांग की गयी। उस मांग को दादाभाई नौरोजीने समर्थन दिया।
  14. ब्रिटिश राज्यकर्ता ने भारत की बहोत आर्थिक लुट कर रहे थे। ये दादाभाई ने ‘लुट का सिध्दांत’ या ‘नि:सारण सिध्दांत’ से स्पष्ट किया।
ग्रंथ संपत्ती – पावर्टी और  अन ब्रिटिश रुल इन इंडिया।
विशेषता    –
  • भारत के पितामह।
  • भारतीय अर्थशास्त्र के जनक।
  • आर्थिक राष्ट्रवाद के जनक।
  • रॉयल कमीशन के पहले भारतीय सदस्य।
मृत्यु  – 30 जून, 1917 को दादाभाई नौरोजीका देहांत हुवा।
NOTE:-दोस्तों पोस्ट को बनाने में घंटो लग जाते है क्या आप हमे दो मिनट्स दे सकते है तो  इसको आप whatsapp or facebook पर शेयर करे और आपको इसमें कोई गलती लगे तो आप कमेंट में लिखे तो हम इसको जल्दी से जल्दी अपडेट करने की कोशिश करेंगे        

Friday, 8 December 2017

वॉरेन बफे शेयर बाजार का जादूगर | Warren Buffett Biography Hindi

वॉरेन बफे शेयर बाजार का जादूगर | Warren Buffett Biography Hindi-

“आप अगर उन चीजों को खरीदते हैं, जिनकी आपको बिलकुल जरूरत नहीं है, तो शीघ्र ही  आपको उन चीजों को बेचना पड़ेगा जिनकी आपको सबसे जादा जरूरत है.”
                                     – WARREN BUFFETT

वॉरेन बफे की जीवनी – Warren Buffett biography in Hindi

वॉरेन बफे का नाम आज दुनिया मैं सबको पता हैं, ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं, दुनीया इनको वॉरेन बफे के नाम से कम और शेयर बाजार का खिलाडी, वॉल स्ट्रीट का जादूगर और बर्क़शायर हैथवे (Berkshire Hathaway) का बादशहा इस नाम से ज्यादा जानती है, दुनीया मैं ऐसा कोई भी अखबार, टी. वी. चैनेल नहीं होगा जिसमे वॉरेन बफे की चर्चा नहीं होती होंगी.
2008 तक, अनुमानतः 62 अरब U.S डॉलर  की कुल संपत्ति (Net Worth) के कारण फ़ोर्ब्स (Forbes) द्वारा उन्हें दुनिया का सबसे अमीर आदमी (Richest person in the world) आंका गया था।
बल्कि दुनिया मैं वो अरबपति होने के वजह से इतने ज्यादा चर्चा मैं नहीं रहे, जितनेकी, अरबपति होने के बावजूद उनकी जो जीवन शेली हैं उसकी वजह से वो चर्चा मैं रहे, बफे दुनिया के उन सभी अमीरों से हर मायने मैं अलग हैं, कारोबार की पूरी तरह से समाज रखने वाले बफे मैं कई खूबिया हैं जो उनके नाम को एक अलग पहचान देती हैं.
सबसे बड़ी बात ये हैं की बफे ने अपनी कुल संपति का लगभग 85% हिस्सा Bill Gates की Bill & Melinda Gates Foundation को दान मैं देकर इतिहास रच दिया ओर दुनिया का सबसे बड़े दानवीर बन गए…
बफे के पिता शेयर बाजार मैं कारोबारी थे, बफे ने 11 साल की उम्र मैं अपने पिता के साथ शेयर बाजार मैं अपने कारोबारी जीवन की शुरवात की, बफेट नें 13 साल की उम्र मैं अपना पहला आयकर विवरण दायर किया और अपनी साईकिल के ३५ डालर को एक व्यय के रूप में घाटा दिया.
15 साल की उम्र मैं High School अंतिम वर्ष में बफेट और उनके एक साथी नें 25 डालर में एक इस्तेमाल की हुई पिनबाल मशीन खरीदी और उसे एक नाइ की दुकान में रख दिया. मात्र कुछ महीनों में उनके पास तीन मशीनें भिन्न भिन्न जगहों पर हो गई थीं।
20 साल उम्र मैं बफेट नें हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे ठुकरा दिया गया था। फिर Warren Buffett नें कोलंबिया बिजनेस स्कूल (Columbia Business School) में दाखिला लिया क्योंकि उन्हें पता था की बेंजामिन ग्राहम (Benjamin Graham) और डेविड डोड (David Dodd), दो जाने-माने प्रतिभूति विश्लेषक (securities analyst), वहीं पढ़ते हैं। उन्ही गुरु से बफेट नें शेयर बाजार मैं निवेश करने के गुण सिखे.
आज बफेट के पास जीतनी संपति हैं उनकी जीवन शैली उतनी ही सरल हैं, बफेट आज भी उसी घर मैं रहते हैं जो उन्होंने 5 दशक पहले ख़रीदा था, वे अपनी कार खुद चलते हैं, ना तो उनके पास कोई ड्राईवर हैं, ना कोई सुरक्षा गार्ड, वे कभी निजी विमान से यात्रा नहीं करते, वो अपने सभी CEO को साल मैं केवल एक बार पात्र लिखते हैं..
दोस्तों, वॉरेन बफेट की शक्सीयत को समजना या उनके बारे मैं कोई भी एक राय बना पाना शेयर बाजार की तरह ही पेचीदा हैं.

वॉरेन बफेट के कुछ बेहतरीन टिप्स – Warren Buffett tips

  1. “कमाई : कभी भी अकेली आय पर निर्भर न रहे. आय का दूसरा साधन बनाने के लिये निवेश करे.”
  2. “सफलता : जब मौके आते है तभी आप कोई काम करते हो. मेरे जीवन में एक ऐसा पल भी आया था जब मेरे पास उपायों का गठरा पड़ा था. लेकिन यदि मुझे अगले हफ्ते कोई उपाय आता है तो ही मै कुछ कर पाउँगा अन्यथा मै कुछ नही कर पाउँगा.”
  3. “खर्च : यदि आपको जिसकी जरुरत नही है वो चीज़े आप खरीद रहे हो तो एक दिन आपको जिन चीजो की जरुरत है उस चीजो को बेचना पड़ेगा.”
  4. “सेविंग : खर्च करने के बाद जो बचे उसे सेव न करे लेकिन सेव करने के बाद जो बचा उसे खर्च अवश्य करे.”
  5. “जोखिम : कभी भी नदी की गहराई को दो पैरो से नही नापना चाहिये.”
  6. “निवेश : कभी भी अपने सारे अन्डो को एक ही बास्केट में न डाले.”
  7. “उम्मीद : इमानदारी सबसे महंगा तोहफा है. छोटे लोगो से इसकी उम्मीद ना करे.”
  8. “इंसानियत : यदि आप इंसानियत के 1% लकी लोगो में भी शामिल हो, तो आप 99% लोगो को इंसानियत सिखा सकते हो.”
Note: आपके पासAbout Warren Buffett in Hindi मैं और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट मैं लिखे हम इस अपडेट करते रहेंगे.
अगर आपको हमारी Life History Of Warren Buffett in Hindi Language अच्छी लगे तो जरुर हमें Facebook और Whatsapp पर Share कीजिये.